विष्णु की दावत



हमारे हिन्दु शास्त्रों में एक बड़ा सुंदर दृष्टांत आता है कि एक बार भगवान विष्णु ने देवताओं और दैत्यों को भोज पर बुलाया। दोनों अलग-अलग पंक्तियों में बैठ गए। भगवान विष्णु ने कहा, "देखो भई, मैंने यह स्वादिष्ट भोजन आप लोगों के लिए बनवाया है, जी भर के खाओ। मगर एक शर्त है, खाते वक्त आपका हाथ सीधा रहे, टेढा न होने पाए।" अब जो दैत्य थे, (अर्थात दुनियादार लोग थे) वे कहने लगे, "बाजू को मोड़े बिना हम खाना उठाकर मुँह में कैसे डाल सकते हैं?" उन्होंने सोचा कि यह शर्त लगाकर भगवान ने हमारा अपमान किया है। वे क्रोध में आकर दावत से उठकर चले गए। जो देवता थे (समझदार लोग), उन्होंने सोचा, 'यह बात भगवान ने कही है, इसमें कोई राज़ (रहस्य) ज़रूर है।" आख़िर में बात उनकी समझ में आ गई। कहने लगे, "ठीक ही तो है, मैं अपने साथी को खिलाऊँ, साथी मुझे खिलाए। न हाथ टेढ़ा करना पड़ेगा न कुछ।" हम हाथ टेढ़ा करते हैं, अपना मतलब पूरा करने के लिए और यही दुनिया में खराबियों की जड़ है। यदि हम देना सीख जाएँ, इस शिक्षा को पल्ले बाँध लें कि "जब तक देह है, दे, दे, पुनि दे" तो हमारी सारी मुश्किलें ख़त्म हो जाएँ। अगर हम किसी को भूखा न रहने दें, तो हम कहाँ भूखे रहेंगे? कोई भी भूखा नहीं रहेगा। अगर हम कोशिश करें कि कोई भी नंगा न रहे, तो कुदरती तौर पर हम भी नंगे नहीं रहेंगे। अगर हम दूसरों को खुश करें, तो हम भी खुश रहेंगे। मगर होता क्या है? हम अपने लिए जीते हैं, और यही सारी बुराइयों कि जड़ है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Grace Slick: The Acid Queen’s Quiet Reign in 2025 – March 9 Update

Where Are Octomom’s Kids Now? A Look at Natalie Suleman’s Family in 2025

Shivon Zilis: The AI Visionary Shaping the Future